"कृष्णम वंदे जगद्गुरुम"
पुण्य परोपकार ट्रस्ट
में आपका स्वागत है।
ट्रस्ट जगद्गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण जी से प्रेरित होकर समाज में निस्वार्थ भाव से प्रेम, दया और करुणा के साथ साथ श्रीमद्भागवत गीता जी में दिए गए ज्ञान को जन जन में व्यावहारिक रूप से प्रचार करना चाहता है, ताकि लोगों के मानवीय मूल्यों की संरक्षा की जा सके।
- लखनऊ स्थित जगद्गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण ज्ञान प्रसार केंद्र का निर्माण।
- जगद्गुरु द्वारा का निर्माण
- श्रीकृष्ण जी के जीवन दर्शन, श्रीमद्भागवत गीता जी तथा विश्व के तमाम संतों, मनीषियों द्वारा दिए गए ज्ञान को संग्रहीत करके पुस्तकालय का निर्माण आदि आदि।
हमारे बारे में
• ज्ञान केंद्र की स्थापना का प्रमुख उद्देश्य ही है कि लोग योगेश्वर श्रीकृष्ण जी को जगद्गुरु स्वीकारें, तथा उनके दिए गए ज्ञान के आधार पर अर्जुन की भांति जीवन की चुनौतियों को जीतें।
• समाज के वंचित, शोषित व उपेक्षित रहे लोगों को श्रीमद्भगवत गीता के ज्ञान से जोड़कर जागरुक करना, तथा उनकी सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करना।
• पृथ्वी पर सबसे ज्यादा बुद्धिमान जीव मनुष्य है, और सबसे ज्यादा परेशान जीव भी मनुष्य है, तथा अन्य जीवों और प्रकृति को मनुष्य ने ही परेशान कर रखा है। इसलिए सबसे ज्यादा सुधार की आवश्यकता मनुष्य को ही है। सुधार का माध्यम केवल ज्ञान ही होना चाहिए।
• हमारे देश में अनेक महापुरुषों ने जन्म लिया। वे हमारे बीच में नहीं हैं, परन्तु उनका दिया गया ज्ञान तथा बताए गए मार्ग को ग्रहण कर लेने से जीवन सुखमय और आनंदपूर्ण हो जाता है। जिन महापुरुषों ने हमें सत्य का मार्ग दिखाया है, उन सभी का हमें सम्मान करना चाहिए।
• श्रीमद्भगवत गीता में योगेश्वर श्रीकृष्ण जी ने अर्जुन को कहा है कि ज्ञान प्राप्त करो, उसके आधार पर कर्म करो, साथ में यह भाव भी आ जाए कि कर्म करना मेरा कर्तव्य भी है, तो आनंदमयी सफलता प्राप्त होती है।
• युवाओं को ज्ञान और कर्म के महत्त्व को समझाकर सत्य के मार्ग पर धर्म व साहस के साथ आगे बढ़ने के लिए संकल्पित करना, देश के विकास में भागीदारी सुनिश्चित करना, हमारा उद्देश्य व कर्तव्य होना चाहिए। इससे देश व सम्पूर्ण जगत को स्वर्ग बनाया जा सकता है।
• श्रीमद्भगवत गीता सहित विश्व के तमाम ग्रंथों/दर्शनशास्त्रों तथा संत महापुरुषों द्वारा दिए गए उपयोगी ज्ञान को उपलब्ध कराया जाना है तथा शोध किए जाने हैं।
• भारतीय संस्कृति के संस्कारों व महत्व को जन-जन में प्रसारित किया जाना है।
• इच्छुक अभ्यर्थियों को धार्मिक अनुष्ठान कराने के लिए शिक्षित, दीक्षित किया जाना है।
• लखनऊ के बाद जगद्गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण ज्ञान प्रसार केंद्र पूरे देश में जगह-जगह स्थापित किए जाने हैं।
• समाज के अशक्त वृृद्ध व असहाय जनों को आश्रय देने हेतु स्थाई व्यवस्था की जानी है।
• योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार की व्यवस्था की जानी है।
• समाज में सात्विकता, स्वदेशी, स्वावलंबन तथा स्वस्थ संबंधों के संस्कारों को विकसित करने के प्रयास किए जाने हैं। इस सम्बन्ध में केंद्र पर नित्यप्रति लाभकारी भजन, कीर्तन, सत्संग, स्वाध्याय आदि किए जाने हेतु व्यवस्था की जाएगी।
• तमाम कुरीतियों, विसंगतियों को ज्ञान के माध्यम से दूर कर कर्म एवं सेवाभाव के महत्व को स्थापित करना है।
• विश्व में अधर्म के नाश, सत्य और न्याय की स्थापना के लिए हमें जगद्गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण जी की वाणी श्रीमद्भगवत गीता के ज्ञान को आधार बनाकर आगे बढ़ने की आवश्यकता है। योगेश्वर श्रीकृष्ण ही हमारे धर्मगुरु हैं।
हमारे उद्देश्य और सिद्धांत
निस्वार्थ सेवा, गहरी श्रद्धा और असीम करुणा के माध्यम से समाज में जागरूकता, सद्भाव और सकारात्मक परिवर्तन लाना — ताकि हर व्यक्ति एक बेहतर, दयालु और मूल्यों से सम्पन्न जीवन की ओर बढ़ सके।
पुण्य परोपकार ट्रस्ट का उद्देश्य मानवता को सही दिशा देना और समाज में प्रेम, सत्य तथा करुणा की भावना को प्रोत्साहित करना है। हमारा विश्वास है कि सच्चा धर्म वही है जो किसी के काम आए, और सच्चा ज्ञान वही है जो जीवन में प्रकाश लाए। योगेश्वर श्री कृष्ण की शिक्षाओं से प्रेरित होकर हमारा प्रयास है कि हर व्यक्ति सम्मान और संवेदना के साथ जीवन जी सके; कोई भी भूख, अभाव या अज्ञान के कारण पीछे न रह जाए; और समाज में सेवा, एकता तथा सद्भाव की भावना निरंतर मजबूत होती रहे।
1. ज्ञान (Knowledge)
श्रेयान्द्रव्यम याद्यज्ञाज्ज्ञा
सर्वं कर्माखिलं पार्थ ज्ञाने परिसमाप्यते।।4.33।।
“ज्ञान से बढ़कर कोई पवित्रता नहीं।” हम आध्यात्मिक, नैतिक और सांस्कृतिक शिक्षा के प्रसार के लिए कार्य करते हैं। हमारा उद्देश्य समाज में सही समझ, विवेक और मूल्य-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करना है।
2. सेवा (Service)
निष्काम सेवा हमारा मूल मंत्र है।
गीता जी के संदेश कि ….
“कर्मण्ये वाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफल हेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्व कर्मणि॥ 02.47 ॥
से प्रेरित होकर हम भूखों को भोजन, बीमारों को उपचार और ज़रूरतमंदों को सहारा देने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
3.धार्मिक जीवन (Religious Life)
धर्म केवल पूजा नहीं, बल्कि सही मार्ग पर जीवन जीना है।
हम सत्य, अनुशासन, सदाचार और चरित्र निर्माण को बढ़ावा देकर संस्कारी और मजबूत पीढ़ी का निर्माण करने का प्रयास करते हैं।
हमारा विजन और मिशन
हमारा मिशन जगद्गुरु योगेश्वर श्रीकृष्ण जी के दिखाए गए ज्ञान मार्ग पर आधारित कर्म करते हुए मानवता, करुणा और आध्यात्मिक जीवन को दुनिया में जागृत करना है।
पुण्य परोपकार ट्रस्ट में हमारा विज़न एक ऐसी दुनिया का निर्माण करना है जो ज्ञान मार्ग आधारित कर्म के आधार पर प्रेम, शांति और दया से परिपूर्ण हो। हम ऐसा समाज बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं जहाँ हर व्यक्ति सम्मान, आशा और सच्ची खुशी के साथ जीवन जी सके। भगवान श्री कृष्ण के दिव्य ज्ञान से प्रेरित होकर हमारा विश्वास है कि वास्तविक आनंद दूसरों की सहायता करने और निस्वार्थ सेवा में ही निहित है।
हमारा मिशन ज़रूरतमंद लोगों की मदद करना है—भूखों को भोजन उपलब्ध कराकर, गरीब बच्चों को शिक्षा दिलाकर, और उन लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करके जो इसका खर्च वहन करने में सक्षम नहीं हैं।
साथ ही, हम आध्यात्मिक ज्ञान, श्रेष्ठ मूल्यों और जागरूकता के प्रसार के लिए भी कार्यरत हैं, ताकि हर व्यक्ति शांतिपूर्ण, संतुलित और सार्थक जीवन जी सके।
हम ऐसी दुनिया की कल्पना करते हैं जहाँ कोई भूखा न रहे, हर बच्चा शिक्षा प्राप्त करे, और हर परिवार सुरक्षित एवं समर्थ महसूस करे। अपनी छोटी-छोटी सेवाओं और मानवता-पूर्ण प्रयासों से हम समाज में दया, इंसानियत और नैतिक शक्ति का विस्तार करना चाहते हैं।
पुण्य परोपकार ट्रस्ट में हमारा मानना है कि दूसरों की सेवा करना ही पूजा का सबसे पवित्र रूप है। दया का प्रत्येक कार्य हमें भगवान के और निकट लाता है और दुनिया को एक बेहतर स्थान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बनता है।
मिलकर हम प्रेम, देखभाल और सकारात्मक बदलाव से भरी एक सुंदर और संतुलित जीवन-व्यवस्था का निर्माण कर सकते हैं।
हमारे प्रोजेक्ट्स करुणा, सेवा और उद्देश्य के साथ मानवता को एक बेहतर दिशा देना
पुण्य परोपकार ट्रस्ट में हमारा हर प्रोजेक्ट एक दयालु, जागरूक और मूल्यों पर आधारित समाज के निर्माण की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। योगेश्वर श्री कृष्ण की दिव्य शिक्षाओं से प्रेरित होकर, हमारी पहल का उद्देश्य निस्वार्थ सेवा के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक रोशनी, उम्मीद और सहायता पहुँचाना है।
हम शिक्षा, हेल्थकेयर, आध्यात्मिक जागरूकता और सामाजिक कल्याण की विभिन्न पहलों के माध्यम से लोगों के जीवन को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं। हमारी प्रत्येक कोशिश इस विश्वास से प्रेरित है कि सच्ची सेवा वही है जिसमें बिना किसी अपेक्षा के दूसरों की मदद की जाए—ताकि दुनिया और अधिक दयालु, अधिक स्वस्थ और अधिक शांतिपूर्ण बन सके।
स्वास्थ्य सेवा शिविर
ज़रूरतमंद समुदायों को मुफ़्त चिकित्सा जाँच, आवश्यक दवाइयाँ और स्वास्थ्य जागरूकता प्रदान करना, ताकि हर व्यक्ति सम्मान और अच्छी सेहत के साथ जीवन जी सके।
सभी के लिए शिक्षा
गरीब और वंचित बच्चों को निःशुल्क शिक्षा, किताबें और पढ़ाई का सामान उपलब्ध कराकर उनकी मदद करना, ताकि ज्ञान के माध्यम से उनका भविष्य उज्ज्वल हो सके।
भोजन एवं दान अभियान
अन्नदान और ज़रूरी वस्तुओं के डोनेशन ड्राइव आयोजित करना, ताकि कोई भी व्यक्ति भूखा न सोए और हर ज़रूरतमंद को यह महसूस हो कि उसका ध्यान रखा जा रहा है।
आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम
सत्संग, मेडिटेशन सत्र और भारतीय परंपराओं से जुड़े धार्मिक आयोजनों के माध्यम से मन की शांति, सकारात्मकता और सांस्कृतिक जागरूकता को बढ़ावा देना।
कांटेक्ट – पुण्य परोपकार ट्रस्ट
हम आपको सुनकर प्रसन्न होंगे! चाहे आप योगदान देना चाहते हों, वॉलंटियर बनना चाहते हों, या हमारी पहल के बारे में और जानना चाहते हों — हमारी टीम हमेशा जुड़ने के लिए तैयार है। किसी भी प्रश्न, सहायता या सहयोग के अवसरों के लिए हमसे संपर्क करें। साथ मिलकर, हम लोगों की ज़िंदगी में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं
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